अक्सर हम लोग मुश्किलों से घबरा जाते हैं और हालात को अपनी कमज़ोरी मानने लगते हैं, लेकिन सच यह है कि हर संघर्ष अपने साथ, कोई न कोई सीख लेकर आता है|
जीवन कभी भी एक समान नहीं रहता| इसमें सुख-दुःख, सफलता-असफलता, आशा-निराशा हमेशा साथ-साथ चलते हैं| यदि जीवन में संघर्ष न हों, तो इंसान अपने भीतर छिपी हुई शक्ति और क्षमता को कभी पहचान ही नहीं पाएगा| जिस प्रकार सोना आग में तपकर और अधिक चमकदार बनता है, उसी प्रकार इंसान भी संघर्षों से गुज़रकर और निखरता है।
जीवन की परेशानियाँ हमें यह समझाती हैं कि सफलता का असली आनंद तभी मिलता है, जब उसके पीछे मेहनत, धैर्य और संघर्ष छिपा हो| इसलिए हमें जीवन के संघर्षों से भागना नहीं चाहिए, बल्कि उनका साहस और ख़ुशी के साथ सामना करना चाहिए। क्योंकि जीवन के यही संघर्ष लिए, एक सामान्य व्यक्ति को उसकी वास्तविक पहचान और असली क्षमता से परिचित कराते हैं और जीवन को वास्तविक अर्थ प्रदान करते हैं।
लड़ने पड़े युद्ध कितने ही, खड़ा रह मैदान में डटकर
हार को भी हरायेगा तू, जीत अपनी सुनिश्चित कर
चुनौतियाँ स्वीकार कर…सहर्ष कर, संघर्ष कर
दिखे न मंज़िल तुझे, चट्टानें हों हर तरफ
रास्ते बना ले अपने, चट्टानों को काटकर
प्रण कर रुकेगा तू, मंज़िल को ही पाकर
चुनौतियाँ स्वीकार कर…सहर्ष कर, संघर्ष कर
डराये समुंदर तुझे, फेंके दूर लहरें तुझे
पानी में ही डूब कर, सिंधु को तू पार कर
चुनौतियाँ स्वीकार कर…सहर्ष कर, संघर्ष कर
संघर्ष ही जीवन है, और जीवन एक संघर्ष
पर्याय मान जीवन का, संघर्ष का सत्कार कर
चुनौतियाँ स्वीकार कर…सहर्ष कर, संघर्ष कर
~ तूलिका श्रीवास्तव “मनु”